साधारण समाज की रगों से निचुड़ा खून-पसीना राजनीति की मशीन में पहुँच कर किस प्रकार एक ‘भव्य अभिनन्दन’ बन कर ‘कुछ’ व्यक्तियों की सत्ता का आधारस्तम्भ बन जाता है-इस कटु तथ्य के आस-पास बुने ताने-बाने से यह उपन्यास-कृति निर्मित है। …सभी चेहरे हमारे-आपके जाने-पहचाने से लगते हैं। नाम कुछ और होंगे, जगहें कुछ और होंगी…घटनाओं का क्रम भी इसी प्रकार न हो तो क्या हुआ? हमारी सामाजिक-साहित्यिक-राजनीतिक विडम्बना-भरी जिन्दगी पर एकदम अछूता और करारा व्यंग्य।
साधारण समाज की रगों से निचुड़ा खून-पसीना राजनीति की मशीन में पहुँच कर किस प्रकार एक ‘भव्य अभिनन्दन’ बन कर ‘कुछ’ व्यक्तियों की सत्ता का आधारस्तम्भ बन जाता है-इस कटु तथ्य के आस-पास बुने ताने-बाने से यह उपन्यास-कृति निर्मित है। …सभी चेहरे हमारे-आपके जाने-पहचाने से लगते हैं। नाम कुछ और होंगे, जगहें कुछ और होंगी…घटनाओं का क्रम भी इसी प्रकार न हो तो क्या हुआ? हमारी सामाजिक-साहित्यिक-राजनीतिक विडम्बना-भरी जिन्दगी पर एकदम अछूता और करारा व्यंग्य।
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Nagarjun (नागार्जुन) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 136 |
| Year/Edtion | 2009 |
| Subject | Satire.Fiction |
| Contents | N/A |
| About Athor | "नागार्जुन – जन्म : 1911 ई. ग्राम तरौनी, ज़िला दरभंगा (बिहार)। परम्परागत प्राचीन पद्धति से संस्कृत की शिक्षा। सुविख्यात प्रगतिशील कवि-कथाकार स्वभाव से आवेगशील। राजनीति और जनता के मुक्ति-संघर्षों में सक्रिय और रचनात्मक हिस्सेदारी। हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली, संस्कृत और बंगला में काव्य-रचना। मैथिली काव्य-संग्रह 'पत्रहीन नग्न गाछ' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित। हिन्दी कविता के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा 'मैथिलीशरण गुप्त' सम्मान और समूची साहित्य-साधना के लिए उ.प्र. द्वारा ‘भारत-भारती' पुरस्कार, बिहार सरकार द्वारा 'राजेन्द्र शिखर' सम्मान से सम्मानित। अन्य कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित। विभिन्न कृतियों का देश-विदेश की कई भाषाओं में अनुवाद। " |














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