| कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक कहने की विधा है कविता। जब अपने व्यथित मन के भावों को कुछ पंक्तियों में ही विस्तृत रूप से व्यक्त करने की अनिवार्यता महसूस होती है तब कविता जन्म लेती है। जब मन में तीव्र वेदना हो तो वह स्वतः ही कविता के रूप में फूट पड़ती है। कविता के लिए प्रयत्न करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। |
| कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक कहने की विधा है कविता। जब अपने व्यथित मन के भावों को कुछ पंक्तियों में ही विस्तृत रूप से व्यक्त करने की अनिवार्यता महसूस होती है तब कविता जन्म लेती है। जब मन में तीव्र वेदना हो तो वह स्वतः ही कविता के रूप में फूट पड़ती है। कविता के लिए प्रयत्न करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। |
| author | Govind 'Govind' (गोविंद 'गोविंद') |
|---|---|
| publisher | Vani Prakashan |
| language | Hindi |
| pages | 68 |















