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Sookhta Hua Talaab (सूखता हुआ तालाब)

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“सूखता हुआ तालाब –
रामदरश मिश्र ने अपने उपन्यास ‘सूखता हुआ तालाब’ में ग्राम्य जीवन के आंचलिक परिवेश, ग्रामीणों के रहन-सहन, बनते-बिगड़ते सम्बन्ध आदि का अत्यन्त यथार्थ चित्रण किया है। उन्होंने सत्य को देखते हुए एक सत्य कथा निर्मित भी की है। अंचल की स्वाधीनता, ग्रामीण जीवन के टूटते मूल्य एवं यथार्थ का व्यंग्यपूर्ण चित्रण इस लघु उपन्यास की ख़ासियत है।

‘सूखता हुआ तालाब’ उपन्यास का मूल उद्देश्य एक समस्या की ओर पाठकों का ध्यान दिलाना है जिसमें जल केन्द्र में है। जल की समस्या को सामने रखते हुए इस समस्या को सिरे से उठाया गया है कि यह किसान के लिए तो गम्भीर है ही साथ ही महानगरों के लिए भी आने वाले समय में जल की कमी कमी भयंकर समस्या बनकर सामने आयेगी। लगभग 80 पन्नों का यह उपन्यास अपने आप में पूर्ण है जो पाठकों को अपने भविष्य पर विचार करने के लिए एक मंच देता है।”

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Ramdarash Mishra (रामदरश मिश्र)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

80

Year/Edtion

2011

Subject

Novel

Contents

N/A

About Athor

"रामदरश मिश्र –
रामदरश मिश्र हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं। हिन्दी साहित्य की कई विधाओं में इनका प्रचुर लेखन पाठकों के लिए सहज ही उपलब्ध है। वे जितने समर्थ कवि हैं उतने ही समर्थ उपन्यासकार और कहानीकार भी हैं। इनकी लम्बी साहित्य-यात्रा समय के कई पड़ावों से होती हुई लगातार परिष्कृत होती गयी। इनके विषय में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ये किसी वाद के कृत्रिम दबाव या खिलवाड़ में नहीं शामिल हुए बल्कि उन्होंने अपने लेखन में कथावस्तु और शिल्प दोनों को सहज ही परिवर्तित होने दिया। अपने परिवेश से ग्रहण किए अनुभवों एवं विचार को सृजन में उतारते हुए उन्होंने गाँव की मिट्टी, सादगी और मूल्यधर्मिता को अपनी रचनाओं में व्याप्त होने दिया जो उनके व्यक्तित्व की पहचान भी है। गीत, नयी कविता, छोटी कविता, लम्बी कविता यानी कि कविता की कई शैलियों में उनकी सर्जनात्मक प्रतिभा ने अपनी प्रभावशाली अभिव्यक्ति के साथ-साथ ग़ज़ल में भी उन्होंने अपनी सार्थक उपस्थिति रेखांकित की। इसके अतिरक्त उपन्यास, कहानी, संस्मरण, यात्रावृत्तान्त, डायरी, निबन्ध आदि सभी विधाओं में उनका साहित्यिक योगदान बहुमूल्य है।
"

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