“मुक्तिबोध की विलक्षणता
अपनी बेबाक टिप्पणी और समकालीन साहित्यिक विमर्श को तरजीह देने वाले सुप्रसिद्ध कवि एवं आलोचक अरुण शीतांश के सम्पादन में प्रकाशित यह पुस्तक आज के सर्वाधिक चर्चित, विश्लेषित कवि गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ की रचनात्मकता, वैचारिकी, शिल्पगत विशेषताओं की सम्यक मीमांसा है। अरुण शीतांश की फ़ितरत है, किसी रचनाकार को डूब कर पकड़ने की। यूँ तो मुक्तिबोध पर अनेक शोधपूर्ण पुस्तकें, समीक्षाएँ प्रकाशित होती रही हैं, किन्तु प्रस्तुत पुस्तक पहले की अवधारणाओं, उन्हें समझने के पूर्व के निकष से कुछ अलग और विशिष्ट प्रतीत होगी। यहाँ एक नयी दृष्टि, नये चिन्तन के साथ उनको जानने, देखने, समझने और विश्लेषित करने की सार्थक पहल दिखती है। सच तो यह है कि जैसे-जैसे समय बीतता जायेगा, मुक्तिबोध की प्रासंगिकता बढ़ती जायेगी, उनके विचारों की रौशनी में हम परत-दर-परत उन्हें उकेरते हुए उन तक पहुँचते जायेंगे।
अरुण शीतांश का मानना है कि हम अब तक ‘अँधेरे में’ हैं, क्योंकि मुक्तिबोध स्वयं ही अभी ‘अँधेरे में’ हैं। जब तक आम पाठक उन तक पहुँचकर उनसे संवाद स्थापित नहीं कर पाते, जब तक व्यवस्था-जनित यथास्थितिवादिता, असंगतियों, छद्म मानवीय उपक्रमों से मुठभेड़ करतीं उनकी कविताओं में गहरे तक उतरते नहीं, तब तक मुक्तिबोध हमें बेचैन करते रहेंगे और इसके बाद भी उनके समय की पीड़ा में घुला उनका प्रतिरोधी स्वर काल-पुत्र की तरह शब्द और समय की क्रान्ति के लिए हमें ललकारता रहेगा। मुक्तिबोध की इसी विलक्षणता तथा उनकी रचनात्मकता के मर्म को पकड़ने में लेखकों ने श्लाघनीय प्रयास किया है और एक लम्बी अवधि के भगीरथ प्रयत्न का परिणाम दिया है इसके सम्पादक अरुण शीतांश ने। अनेक ख्यातिलब्ध, अन्वेषी साहित्यकारों से आग्रहपूर्वक आलेख तैयार कराये हैं, तो कुछ आख्यानों को विभिन्न पत्रिकाओं से चयनित किया है।
बहुत संजीदगी और संचेतना के साथ सम्पादित यह पुस्तक मुक्तिबोध को अँधेरे में भी देख, समझ पाने की दृष्टि प्रदान करेगी, ऐसा मुझे विश्वास है। और इस प्रस्तुति के लिए सम्पादक अरुण शीतांश धन्यवाद के अधिकारी हैं. वैसे—‘अभी कुछ और उनको जानना है मुक्तिबोध फिर-फिर आँकना है’।
—कुमार नयन
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| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Edited by Arun Sheetansh, Mridula Singh (सम्पादक : अरुण शीतांश, मृदुला सिंह ) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 222 |
| Year/Edtion | 2025 |
| Subject | Criticism |
| Contents | N/A |
| About Author | "अरुण शीतांश का जन्म 02 नवम्बर, 1972 को अरवल जिले के विष्णुपुरा गाँव में हुआ। ★★★ मृदुला सिंह " |
| Age Group | N/A |
















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