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Sansaar Tumhari Parchhayin (संसार तुम्हारी परछाईं)

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“बेहद सादा दिली और ठहराव के साथ मन्द्र स्वर में संसार के कोलाहल और अन्तर्जगत के वीतराग को सामने रखती हुई विपिन चौधरी की ये कविताएँ मितकथन का दुर्लभ उदाहरण हैं जहाँ कवि ने बहुत सारे विवरणों में से चुनिन्दा, हार्दिक और सच्चे चित्रों को चुनकर एक ऐसा काव्य संसार रचा है जहाँ जितना ज़ाहिर है उससे कहीं ज़्यादा पंक्तियों और शब्दों के बीच के अन्तरालों में है जिसका अन्वेषण पाठक को करना है । है
ये कविताएँ एक चुप और गहरी उसाँस के भाषिक विन्यास की तरह हमारे बीच हैं और सीधे हृदय से संवाद करने की मुश्किल सलाहियत रखती हैं। साथ ही ये कविताएँ इकहरे अर्थों में न लिये जाने की माँग करती हैं और आत्मगत तो वे हैं ही नहीं। यह एक गाढ़े स्त्री स्वर की कविताएँ हैं और ऐसा होने में सभी स्त्रियों की ओर से एक साझा स्मृति, प्रेम और रचनात्मकता को संरक्षित रखने का यत्न करती-सी कविताएँ हैं ।
इन कविताओं में प्रेम बारम्बार लौटता है और कई बार इस लौटने में इतना बदल जाता है कि अपनी शक्ल खो बैठता है । एक संयत कवि स्वर प्रतीक्षा के त्रासद अन्त पर भी अपनी विकलता छुपा लेता है, अपने दुःख भी। विपिन की कविताएँ एक रचनात्मक सम्पादन और सेल्फ सेंसरशिप का सुन्दर सन्तुलन बनकर सामने आती हैं ।
– महेश वर्मा”

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Vipin Choudhary (विपिन चौधरी)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

148

Year/Edtion

2023

Subject

Poetry

Contents

N/A

About Athor

"गरिमा श्रीवास्तव
जे एन यू के भारतीय भाषा केन्द्र में बतौर प्रोफ़ेसर कार्यरत, स्त्रीवादी चिन्तक प्रो. गरिमा श्रीवास्तव किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। साहित्य और समाजविज्ञान की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित इनका शोधपरक लेखन गम्भीर अध्येताओं का ध्यान अलग से आकर्षित करता है। प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने युद्ध और युद्ध के बाद की स्थितियों को स्त्रीवादी साहित्य की दुनिया में विरल है। इन्होंने दुनिया भर में हुए युद्ध को देखने और समझने के लिए एक अलग सैद्धान्तिकी विकसित की है जिसके अनुसार युद्ध भले पृथ्वी के किसी ख़ास भूभाग पर लड़ा जाता हो लेकिन अन्ततः वह घटित होता है स्त्री की देह पर। नज़रिये से देखने का जो प्रयास किया है वह हिन्दी भाषा एवं

उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं: आउशवित्ज़ : एक प्रेम कथा (उपन्यास) (2023), हिन्दी नवजागरण : इतिहास, गल्प और स्त्री- प्रश्न (2023), चुप्पियाँ और दरारें (2023), देह ही देश (यात्रा डायरी) (2018), किशोरीलाल गोस्वामी (2016), झूठ का थैला : क्रोएशिया की लोक कथाएँ (2013), लाला श्रीनिवासदास (2007), भाषा और भाषा विज्ञान (2006), 'ऐ लड़की' में नारी चेतना (2003), आशु अनुवाद (2003), हिन्दी उपन्यासों में बौद्धिक विमर्श (1999)।

सम्पादित पुस्तकें : उपन्यास का समाजशास्त्र (2023), हरदेवी की यात्रा (2023), ज़ख़्म, फूल और नमक (2017), हृदयहारिणी (2015), लवंगलता (2015), वामाशिक्षक (2008), आधुनिक हिन्दी कहानियाँ (2004), आधुनिक हिन्दी निबन्ध (2004), हिन्दी नवजागरण और स्त्री श्रृंखला में सात पुस्तकें (2019 ) : 1. महिला मृदुवाणी, 2. स्त्री समस्या, 3. हिन्दी की महिला साहित्यकार, 4. हिन्दी काव्य की कलामयी तारिकाएँ, 5. स्त्री- दर्पण, 6. हिन्दी काव्य की कोकिलाएँ, 7. स्त्री कवि संग्रह।

अनूदित पुस्तकें : ए वैरी ईज़ी डेथ (सिमोन द बोउवार), ब्राज़ीली कहानियाँ (संग्रह) । सम्पर्क : garima@mail.jnu.ac.in, drsgarima@gmail.com
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