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Media Samkalin Sanskritik Vimarsh (मीडिया : समकालीन सांस्कृतिक विमर्श )

Original price was: ₹495.00.Current price is: ₹321.00.

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“मीडिया समकालीन सांस्कृतिक विमर्श –

‘मीडिया’ सिर्फ़ माध्यम नहीं है, वह एक वातावरण, एक ‘स्पेस’ और एक ‘विमर्श’ है। उसकी सत्ता है मीडिया जनतन्त्र का चौथा ‘पैर’ है जो कभी-कभी इतना ताक़तवर होता दिखता है कि बाकी तीन ‘पैरों’ को विचलित करता दिखता है।
उदारीकरण के बीस बरस बाद मीडिया का कारपोरेटाइजेशन, उसका पूँजी निवेशगत भूमण्डलन उसे नये ‘माइंड मैनेजर’ की भूमिका प्रदान करता है।
मीडिया के हर पहलू, हर करवट पर हर रोज़ तीख़ी नज़र रखने वाले प्रख्यात लेखक सुधीश पचौरी अपनी बेबाक क़लम से मीडिया की नित्य ‘वर्चुअल लीला’, उसके प्रभाव और अन्तःक्रियाओं को मिलाकर मीडिया का जो ‘पाठ’ बनाते हैं, वह मीडिया अध्येताओं के लिए एक ज़रूरी ‘टेक्स्ट’ बन गया है।
यहाँ उनके पिछले दो-तीन वर्षों के चुनिन्दा लेख हैं जिनमें इन तीनेक सालों में मीडिया के स्वामित्व से लेकर उससे जुड़ी तमाम समस्याओं की समीक्षा करते हैं। वे मीडिया की बदलावकारी भूमिका को प्रथमतः और अन्ततः सामाजिक विकास की ज़रूरतों से तौलते हैं और मीडिया के दोषों को सोलते हैं।
लेखक के पाठक इन महत्त्वपूर्ण लेखों को एक जगह पढ़कर लाभान्वित होंगे।

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Sudhish Pachauri (सुधीश पचौरी)

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

320

Year/Edtion

2011

Subject

Media

Contents

N/A

About Athor

"सुधीश पचौरी –

जन्म: 29 दिसम्बर, जनपद अलीगढ़।
शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी) (आगरा विश्वविद्यालय), पीएच.डी. एवं पोस्ट डॉक्टरोल शोध (हिन्दी), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
मार्क्सवादी समीक्षक, प्रख्यात स्तम्भकार,मीडिया विशेषज्ञ।
चर्चित पुस्तकें: नयी कविता का वैचारिक आधार; कविता का अन्त; दूरदर्शन की भूमिका; दूरदर्शन : स्वायत्तता और स्वतन्त्रता (सं.); उत्तर-आधुनिक परिदृश्य; उत्तर-आधुनिकता और उत्तर संरचनावाद; नवसाम्राज्यवाद और संस्कृति; नामवर के विमर्श (सं.); उत्तर-आधुनिक साहित्य विमर्श, दूरदर्शन : विकास से उत्तर बाज़ार तक; उत्तर-आधुनिक साहित्यिक-विमर्श; देरिदा का विखण्डन और विखण्डन में 'कामायनी'; मीडिया और साहित्य; टीवी टाइम्स; साहित्य का उत्तरकाण्ड; अशोक वाजपेयी पाठ-कुपाठ (सं.); प्रसार भारती और प्रसारण-परिदृश्य; दूरदर्शन : सम्प्रेषण और संस्कृति, स्त्री देह के विमर्श; आलोचना से आगे; मीडिया, जनतन्त्र और आतंकवाद; निर्मल वर्मा और उत्तर-उपनिवेशवाद; विभक्ति और विखण्डन; हिन्दुत्व और उत्तर आधुनिकता; मीडिया की परख; पॉपूलर कल्चर; भूमण्डलीकरण, बाज़ार और हिन्दी; टेलीविजन समीक्षा : सिद्धान्त और व्यवहार; उत्तर-आधुनिक मीडिया विमर्श; बिन्दास बाबू की डायरी; फासीवादी संस्कृति और पॉप-संस्कृति।
सम्मानः मध्य प्रदेश साहित्य परिषद् का रामचन्द्र शुक्ल सम्मान (देरिदा का विखण्डन और विखण्डन में 'कामायनी'); भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से सम्मानित; दिल्ली हिन्दी अकादमी द्वारा 'साहित्यकार' का सम्मान।
"

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