100% Money back

Search

Need help? 9990860860 Nanhi Shop
Need help? 9990860860 Nanhi Shop

10 in stock

Jungle Gaatha (जंगल गाथा )

125.00

Clear
Compare


जंगल गाथा –
परमू कहता है कि जंगल का बघेश्वर देवता तो ख़ुद साहब बहादुर हैं। घने जंगल से घिरी अंग्रेज़ी के ज़माने की इस विशाल कोठी में बाप-दादाओं के ज़माने से रहते हुए ख़ुद साहब के भीतर एक विशाल जंगल उग आया है। ये जंगल शाश्वत है जो कटता रहता है और नये जंगल उगते-फैलते जाते हैं, साहब बहादुर के भीतर- उनकी जिन्दगियों में वीरभद्र साहब एक विशाल घना जंगल समेटे हैं अपने भीतर। साहब बहादुर निकल नहीं सकते इस जंगल से। परमू सब जानता है। साहब का आदमी है वह। बहुत मुँहलगा है इसलिए डरता नहीं वह उनसे। उनके जंगल से भी नहीं डरता।- पुस्तक अंश

Author

Weight 0.5 kg
Dimensions 22.59 × 14.34 × 1.82 cm
Author

Namita Singh (नमिता सिंह )

Language

Hindi

Publisher

Vani Prakashan

Pages

142

Year/Edtion

2012

Subject

Stories

Contents

N/A

About Athor

"नमिता सिंह –
जन्म : 4 अक्टूबर, 1944, लखनऊ।
शिक्षा : एम.एससी., पीएच.डी.।
कृतियाँ : खुले आकाश के नीचे, राजा का चौक, नीलगाय की आँखें, जंगल गाथा, निकम्मा लड़का, मिशन जंगल और गिनीपिग (सभी कहानी संग्रह) अपनी सलीबें (उपन्यास)।
दिव्या : इतिहास, संस्कृति और नारी विमर्श (सम्पादित)। स्त्री विमर्श और सामाजिक मुद्दों पर निरन्तर लेखन! नव-साक्षरों के लिए अनेक पुस्तिकाओं का लेखन! 'कर्फ्यू' कहानी पर दूरदर्शन द्वारा टेलीफ़िल्म का निर्माण और प्रसारण।
अनेक कहानियाँ उर्दू, अंग्रेज़ी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनूदित।
अनेक सामाजिक संस्थाओं से सम्बद्ध और सामाजिक कार्यों में सक्रिय। 'वर्तमान साहित्य' का सम्पादन।

"

Reviews

There are no reviews yet.

Write a review

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to Top
Product has been added to your cart