“जायज़ हत्यारे –
‘जायज़ हत्यारे’ उन क्रान्तिवीरों की कहानी है जो हिंसक क्रान्ति द्वारा अंग्रेज़ों से भारत को आज़ाद कराने के लिए प्रयत्नशील थे। नौजवान क्रान्तिकारियों का यह दल अंग्रेज़ गर्वनर को बम फेंक कर मारने के मौके की तलाश में हैं जिससे अंग्रेज़ी हुकूमत को डरा कर देश छोड़ने के लिये मजबूर किया जा सके। दल का केन्द्रीय पात्र विमी तय समय पर गवर्नर की बग्घी पर बम फेंकने के लिए जाता है, पर बग्घी में बच्चों को भी बैठे देख कर वह बम नहीं फेंकता और लौट आता है। ऐसे ही मानवीय पक्षों की बात करता है यह नाटक नोबेल पुरस्कार विजेता फ्रांसीसी साहित्यकार अल्बेयर कामू की सुप्रसिद्ध कृति ‘जस्ट एसासिन्स’ का हिन्दी रूपान्तरण सुरेश भारद्वाज एवं दीपा साही ने किया।
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