| अनजान शत्रु – रहस्मयी घटनाओं के बीच मानव और समाज किस तरह से अपना जीवन जीता, देखता और समझने का प्रयास करता है, इस बिन्दु को इस कथा का सारतत्व कहा जा सकता है। लेकिन यह भी सत्य है कि कोई भी कथा सदा अपूर्ण होती है और उसके रहस्य को केवल महसूस किया जा सकता है। ‘अनजान शत्रु’ भी एक ऐसी कृति है जो पाठकों को रोमांचित तो करती ही है साथ ही उनके मन में कुछ उलझे प्रश्न भी छोड़ जाती है। |
| अनजान शत्रु – रहस्मयी घटनाओं के बीच मानव और समाज किस तरह से अपना जीवन जीता, देखता और समझने का प्रयास करता है, इस बिन्दु को इस कथा का सारतत्व कहा जा सकता है। लेकिन यह भी सत्य है कि कोई भी कथा सदा अपूर्ण होती है और उसके रहस्य को केवल महसूस किया जा सकता है। ‘अनजान शत्रु’ भी एक ऐसी कृति है जो पाठकों को रोमांचित तो करती ही है साथ ही उनके मन में कुछ उलझे प्रश्न भी छोड़ जाती है। |
| author | Jule Barne (जुले बर्न) |
|---|---|
| publisher | Vani Prakashan |
| language | Hindi |
| pages | 95 |
Bestsellers
1857 A Friend In Need 1887 Friendship Forgotten by William Digby
₹300.00 – ₹400.00(0 Reviews)
47,53,romn 4,5,6, 37, 82
Ravindra Nath Tagore Rachnawali - Do Bahan, (Part-50)
(0 Reviews)
A Colour Handbook on Fundamentals of Entomology
(0 Reviews)
Ravindra Nath Tagore Rachnawali - Tash Ka Desh (Part-6)
(0 Reviews)
Ve Din by Nirmal Verma
(0 Reviews)
The Battle Royale English Translation of Kurushetra (The Battle Royale)
₹125.00 – ₹162.00(0 Reviews)
Maru Kesari (मरु-केसरी)
(0 Reviews)













