यह फ्रेंच लेखक, दार्शनिक और पत्रकार अल्बेयर कामू की साहित्यिक-सांस्कृतिक जीवनी है, जिसे नारीवादी कथाकार और विचारक प्रभा खेतान ने अपनी निजी श्रद्धांजलि के रूप में लिखा है। कामू को अकसर अस्तित्ववाद से जोड़ कर देखा जाता है, पर उनकी विचारधारा बहुत-से मायनों में अलग और अपनी थी। कामू गरीबी में पैदा हुए, कठिन परिस्थितियों में जिए, बीमारी, अभाव और अकेलेपन से हमेशा घिरे रहे और अन्त में ‘घृणा के बर्फीले तूफानों’ के बीच उनकी मृत्यु हुई। फिर भी उनका रचनात्मक अवदान सबसे अनोखा और मोहक है, क्योंकि वे व्यक्ति और मानवता, दोनों की ट्रेजेडी को समझते थे और उनकी संवेदना आम आदमी की पीड़ा और संघर्ष से जुड़ी रही। प्रभा खेतान के शब्दों में, ‘वास्तव में हृदय से वे ग्रीक थे, भूमध्यसागरीय सभ्यता से प्रभावित थे, इसीलिए हम उनमें वही आदिम आवेग और संवेदना पाते हैं जो स्थान और काल की सीमा से परे है।’
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 22.59 × 14.34 × 1.82 cm |
| Author | Prabha Khetan (प्रभा खेतान) |
| Language | Hindi |
| Publisher | Vani Prakashan |
| Pages | 188 |
| Year/Edtion | 2009 |
| Subject | Biography |
| Contents | N/A |
| About Athor | जन्म: 1 नवम्बर, 1942 शिक्षा: एम.ए. पी-एच.डी. (दर्शनशास्त्र) प्रकाशित कृतियाँ उपन्यास: आओ पेपे घर चलें !, छिन्नमस्ता, पीली आँधी, अग्निसंभवा, तालाबंदी, अपने-अपने चेहरे। कविता: अपरिचित उजाले, सीढ़ियाँ चढ़ती हुई मैं, एक और आकाश की खोज में, कृष्ण धर्मा मैं, हुस्न बानो और अन्य कविताएँ, अहल्या। चिंतन: उपनिवेश में स्त्री, सार्त्र का अस्तित्ववाद, शब्दों का मसीहा: सार्त्र, अल्बेयर कामू: वह पहला आदमी। अनुवाद: साँकलों में कैद कुछ क्षितिज (कुछ दक्षिण अफ्रीकी कविताएँ), स्त्री: उपेक्षिता (सीमोन द बोउवार की विश्व-प्रसिद्ध कृति ‘द सेकंड सेक्स’)। संपादन: एक और पहचान, ‘हंस’ का स्त्री विशेषांक भूमंडलीकरण: पितृसत्ता के नये रूप। निधन: 20 सितम्बर, 2008। |
















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